बेतुलमकदिस व मस्जिद अक्सा की तारीख और उन का अहमियत के हामिल होना wzaahat
दुनिया जानती है कि अल्लाह ने पूरी दुनिया की बादशाही ब्रगुजीदा पेगैंब र हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम को दिया हज़रत ने ही अल्लाह के इशारे पर फिलिस्तीन की सर ज़मीन पर एक विशाल मस्जिद बनवाई जिस का नाम रख्खा मस्जिद अक्सा जो बाद में बेतुलमकदीस के नाम से जाना गया जो उसी वकत से किब्ला मुकर्रर हुआ और हज़रत मुहम्मद (सल) के ज़माने नुबुवात के सोलह महीना तक कीब्ला रहा
मस्जिद अक्सा को हज़रत सुलेमान ने केसे बनाया
फिलिस्तीन की बाब्रकत जगह पर यह मस्जिद हज़रत सुलेमान ने जिन्नातों व जीनो के हाथ से अपनी निगरानी में बनवाया मस्जिद को खूबसूरत जिन्नाती नक्शे में ढालने के बाद फिर उस को समुंदरी पत्थर जवाहिरात के जरिए जरा और खूबसूरत बनाया एक नबी ने एक पैगं बर ने मस्जिद बनवाई और इसी मस्जिद को अल्लाह ने यह हक दिया की कयामत के कुरब में जिन लोगों के कब्जे में यह मस्जिद होगी उसी का दीन हक और बरहक समझा जाएगा
फिलिस्तीन की मस्जिद मस्जिद अक्सा पर इतनी लड़ाई कियूं आखिर किया बात है वजह जान्ये
बात असल यह है कि कुदरत की तरफ से मस्जिद अक्सा को यह खुसूसिय्यत और फजीलत दिया है कि कयामत के वक्त आखरी वक्त में यही मस्जिद फैसला कराएगी कि कोनसा मजहब कोनसा दीन हक और सच है यही वजह है कि हर कोई पूरी कोशिश करता है मस्जिद अक्सा हमारे कब्जे में रहे और हमारा दीन सच्चा और अच्छा माना जाए और बाकी सब दीन बातिल टेहर जाए यही वजह है कि सब यहूदी और ईसाई और सबाई और दूसरे धर्म के लोग पूरी कोशिश करता है कि मस्जिद अक्सा हमारी न लकिय्यत होजये खेर एसा होगा नहीं कुछ पल के लिए वह लोग गालिब आसक्त है लेकिन आखिर वक्त में हत्मी फैसला जो होगा वह मस्जिद मुसलमान के कबजे में होगी और सच्चा और अच्छा दीन इस्लाम होगा
🕌 مسجدِ اقصیٰ کے بارے میں مکمل مضمون
🌙 مسجدِ اقصیٰ: تعارف اور فضیلت
مسجدِ اقصیٰ مسلمانوں کے لیے ایک نہایت مقدس اور عظیم مسجد ہے۔ یہ فلسطین کے شہر بیت المقدس (یروشلم) میں واقع ہے۔ یہ اسلام کی تین مقدس ترین مساجد میں شامل ہے۔ مسجدِ اقصیٰ کی سرزمین انبیائے کرام علیہم السلام سے وابستہ رہی ہے اور اس کی دینی و تاریخی اہمیت بہت زیادہ ہے۔
🕋 1. مسجدِ اقصیٰ کی اہمیت
مسجدِ اقصیٰ اسلام کی تین عظیم مساجد میں سے ایک ہے:
مسجد الحرام — مکہ مکرمہ، سعودی عرب
مسجد نبوی ﷺ — مدینہ منورہ، سعودی عرب
مسجد اقصیٰ — بیت المقدس، فلسطین
حضرت ابو ہریرہ رضی اللہ عنہ سے روایت ہے کہ رسول اللہ ﷺ نے فرمایا:
"تین مساجد کے علاوہ کسی مسجد کی طرف خصوصی طور پر سفر نہ کیا جائے: مسجد حرام، میری یہ مسجد (مسجد نبوی) اور مسجد اقصیٰ۔"


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