एक इंसान दिल से इसराईल की मज़म्मत करता है
दुनिया एक आलमी तबाही व जंग की तरफ बढ़ रही है इस्राएल ने जो हरकत फिलिस्तीन के बे कुसूर मुसलमानों के साथ किया है आसमान व ज़मीन उन्हें माफ नहीं करेगी इस्राएल अपनी करतूत की वजह से मलवुं हो चुका है रब उन को ज़रूर गीरिफ्त में लेगा अल्लाह अभी उनको ढील दिया है कि जालिम जुल्म से बाज आजाए लेकिन मलवुन इस्राएल
सारी हद पार कर दिया है अपनी नाकामी और गुनाहों पर परदा डालने के लिए फित्ना फसाद कर रहा है पूरी दुनिया उनकी घिन्नोना हरकत की निन्दा के रही है
इस्लामी मुमालिक अमं पसंद मुल्क है लेकिन जब पानी सर से ऊपर होता है तो वह अच्छी तरह दीफा व सबक सिखाना अच्छी तरह जानता है
हमारी खामूषी को कमजोरी समझने वाले कान खोल कर सुन लो इस्लाम लड़ाई जंग जीदाल में सबकत करने से हमेशा माना करता है हैं अगर कोई दुश्मन पहल करदे तो फिर इस्लाम कि तालीम है कि उन से अच्छी तरह सबक दिखाए जाएं और मुंह तोड़ जवाब दिया जाए इस्लाम के मानने वाले लोग इस्लाम पर आंच आना पसंद नहीं करते हैं जान देकर भी वह इस्लाम की हिफ़ाज़त करना जानता है आज इस्राएल अमरीक के इशारों पर फिलिस्तीन पर भाम बारी तेज करदी है हम अच्छी तरह दुनिया खूब समझती और जानती है अमरीका भी सुन ले अल्लाह सुभान की ताकत के सामने सब ताकत ज़ीरो है जो अल्लाह के घर की हिफ़ाज़त के लिए खड़ा है अल्लाह उन सब की ज़रूर मदद करेगा इंशाअल्लाह
आप को क्या लगता है फिलिस्तीन किस पोजीशन पर रहेगा मतलब आजाद या गुलाम
वैसे तो देखा जाए तो फिलिस्तीन की सर ज़मीन हुज़ूर अलैहिस्सलाम के ज़माने से पहले से ही एक नबयुं व रूसुल की सर ज़मीन रही है हज़रत दावूद के वक्त से मुसलमान वहां प्र आबाद है उनकी बुण्याद रखी हुई मस्जिद अक्सा को हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने पूरा क्या मुसलमान पूरी ज़मीन के मालिक और निगेहबान उसी वक्त से है इस्राएल तो वहां बहुत बाद में जब
इस्राएल फिलिस्तीन में केसे आया और कब से है
हिटलर ने जब यहूदी को बहुत बहुत मारा घर से बेघर क्या तो अमरीका और लंदन ने सब को फिलिस्तीन की सर ज़मीन पर बसाया यही इस्राएल है जो खुद आज हमारे घर पर हमला कर रहा है और फीतना फसाद फेला रहा है लेकिन अब बहुत हुचुका आगे अब फैसला होगा सब तहम्मुल नहीं मुसलमान और इस्लामी देश अपना दिफा और हिफ़ाज़त खुद अच्छी तरह जानते है
अल्लाह मजलूम कि मदद फरमाए आमीन

🕊️ انسانیت کا جنازہ
غزہ میں جاری تباہی نے دنیا کے سامنے ایک انتہائی دردناک انسانی المیہ رکھ دیا ہے۔ گھروں، اسپتالوں، اسکولوں اور بنیادی سہولیات کو پہنچنے والے نقصان اور عام شہریوں کی ہلاکتوں نے لاکھوں لوگوں کی زندگی کو شدید متاثر کیا ہے۔ اقوامِ متحدہ کی حالیہ رپورٹ کے مطابق غزہ کے شہری اب بھی فضائی حملوں، تباہ شدہ عمارتوں، نقل مکانی اور ضروری امدادی سامان کی کمی جیسے خطرات سے دوچار ہیں۔
جب ملبے تلے بچے دبے ہوں، جب زخمیوں کے علاج کے لیے دوائیں اور بجلی محدود ہو، جب خاندان اپنے گھروں سے بے گھر ہوں، تو سوال صرف سیاست کا نہیں رہتا—یہ انسانیت کا سوال بن جاتا ہے۔
ہمیں ہر بے گناہ انسان کی جان کی قدر کرنی چاہیے، خواہ وہ فلسطینی ہو یا اسرائیلی۔ جنگ کے دوران عام شہریوں کا تحفظ، زخمیوں کی مدد اور انسانی امداد کی رسائی بنیادی انسانی اصول ہیں۔ اقوامِ متحدہ نے بھی تمام فریقوں سے شہریوں کو نقصان پہنچانے والی کارروائیاں روکنے اور انسانی امداد کو بلا رکاوٹ پہنچانے کا مطالبہ کیا ہے۔
مسجدِ اقصیٰ ہو یا غزہ کے معصوم بچے—ہمیں نفرت نہیں، انصاف اور امن کی آواز بلند کرنی چاہیے۔
🤲 اے اللہ! فلسطین کے مظلوموں کی حفاظت فرما، زخمیوں کو شفا دے، بے گھر لوگوں کی مدد فرما اور دنیا میں ایسا امن قائم فرما جس میں ہر بے گناہ انسان محفوظ ہو۔ آمین۔
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