ईदुलफितर की  तारीख व अहमियत 

एक ईमान वाले वेक्ती को आज का दिन बहुत ही बेहतर और मुबारक शुमार होता है बड़ी खुशी का मोका है चूंकि एक मुस्लिम जब तीस दिन का रोज़ा रख्ख कर फारिग होता है तो उन के दिल में बहुत खुशी होती है उन कि खुशी का किया कहना अंदर अंदर से बहुत खुश होता है चुकी आज का दिन सब अल्लाह का खास मेहमान होता है 

रोज़ा रखने वाले खुशनसीब इंसान के बारे में एक हदीस कुड्सी सुन लेना मुनासिब है 

हदीस क्यूड्सी में अल्लाह ने ज़िक्र फरमाया है कि जो रमज़ान शरीफ़ के तीस दिन का रोज़ा रख लेता है अल्लाह सुभान खुद उस का बदला बं जाता है यानी अल्लाह ताला उस के इवज बन जाता है बहुत ही खुशी कि बात है कि जिस को अल्लाह ताला मिल जाए इस से बढ़ कर और किया होगा दूसरी जगह रब ने फरमाया है कि जिस को अल्लाह मिल जाए उस को सब कुछ मिल गया दुनिया और दुनिया की सारी ताकत कुछ बिगाड़ नहीं सकती 

इंसान को अल्लाह की तरफ से यह तुहफा अनमोल है 

एक आदमी दुनिया में इस से बेहतर टूहफा और किया लेगा रब की खुश नूदी यानी अल्लाह खुश होजाता है जब अल्लाह खुश होजाए तो और किया चाहिए इंसान को